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उपसभापति चुनाव में इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ से उड़ गया विपक्ष

साल 2014 के बाद से पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी जिस भी जगह से चुनाव लड़ी, हर जगह पार्टी को जीत हासिल हुई है. एक तो पीएम मोदी के प्रति लोगों का समर्थन और ऊपर से बीजेपी के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दिमाग का जादू, विपक्ष को हर चुनाव में मुह की खानी पड़ी. जैसे देश की जनता ने पीएम मोदी को समर्थन दिया, ठीक उसी तरह पीएम मोदी की सरकार ने लोगों की भलाई करके उनके समर्थन पर विश्वास दिखाया. हर चुनाव की तरह राज्यसभा उपसभापति चुनाव में भी अमित शाह के मास्टरस्ट्रोक की वजह से कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों की बैंड बजी हुई है.

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अमित शाह का दिमाग

दरअसल, जहां एनडीए इस चुनाव को लेकर बिल्कुल ही आश्वस्त दिख रही थी, तो वहीं विपक्षी खेमे में खलबली मची हुई थी. इसके पीछे की बड़ी वजह थी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा तैयार किया गया ‘मास्टरप्लान’. जहां विपक्ष पिछले कई दिनों से अपने उम्मीदवार का नाम तक तय नहीं कर पा रही था, तो वहीं एनडीए की तरफ से अमित शाह ने जेडीयू के सांसद हरिवंश नरायाण सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया और उन्होंने नामांकन पत्र भर दिया था . इसके तुरंत बाद ही कांग्रेस सांसद बीके हरी प्रसाद ने भी नामांकन पत्र भरा.

उम्मीदवार तय करने में ही लड़खड़ाई कांग्रेस

विपक्ष की तरफ से पहले जहां एनसीपी सांसद वंदना चव्हाण को उम्मीदवार बनाकर सामने लाने की बात आ रही थी, तो वहीं बाद में अमित शाह के प्लान से एनसीपी सांसद ने अपना नाम वापस ले लिया था. दरअसल, विपक्ष को उम्मीद थी कि, अगर एनसीपी के उम्मीदवार को खड़ा करेंगे तो नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी का समर्थन उनको मिल सकता है. लेकिन विपक्ष ने बीजेडी से संपर्क साधने में देरी कर दी और उससे पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नवीन पटनायक से समर्थन मांग लिया था.

जब एनसीपी द्वारा नाम वापस ले लिया गया, तो विपक्ष की गिनती ही बिगड़ गई उम्मीदवार को लेकर, तो कांग्रेस ने तेलगु देशम पार्टी और तृणमूल कांग्रेस से संपर्क साधा कि वो अपना कोई उम्मीदवार चुनाव में खड़ा करे. लेकिन हार के डर की वजह से दोनों ही पार्टियों ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर किसी तरह की कोई रूचि नहीं दिखाई.

बीजेपी अध्यक्ष का मास्टरस्ट्रोक

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राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव को लेकर जहां विपक्ष पूरी तरह से बिखरी हुई नजर आ रही थी, तो वहीं बीजेपी अध्यक्ष का प्लान बिल्कुल ही तैयार था. उन्होंने बीजेपी के किसी सांसद की जगह नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद को उम्मीदवार बनाया, जिसकी वजह से बीजेडी का समर्थन एनडीए को मिला. बीजेडी के साथ ही कई सारी क्षेत्रीय पार्टियां भी हैं, जो जेडीयू के समर्थन में है. अकाली दल और शिवसेना को भी अमित शाह के इस मास्टरस्ट्रोक के सामने झुकना पड़ा.

किसके पास है कुल कितनी सीट

सरकार के पास कितनी सीट है

एनडीए के पास 91 सीट है और अन्य क्षेत्रीय पार्टी भी एनडीए के समर्थन में है. बीजेडी-9, तेलंगना राष्ट्रीय समिति-6, एआईडीएमके-13, और मनोनीत सांसद-4. तो इन सब को मिलाकर कुल हो जाते हैं 123 सीट.

विपक्ष के पास कितनी सीट है

यूपीए-61, बसपा-4, सपा-13, टीएमसी-13, लेफ्ट-7, टीडीपी-6, एनसीपी-4, डीएमके-4. इन सब को मिलाकर कुल होते हैं 106 सीट. 

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चुनाव के नतीजे

एनडीए के उम्मीदवार और पत्रकार से नेता बने हरिवंश नरायण को 125 सीट मिली, विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को सिर्फ 105 सीट मिली. हर चुनाव की तरह इस चुनाव में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को हार का सामना करना पड़ा और अमित शाह द्वारा तैयार किए गए चक्रव्यू में एक बार फिर से विपक्षी पार्टियां सिमट कर रह गई.

तो अब आंकड़ा सामने है कि, आखिर किसकी जीत हुई है और कौन फिर से अविश्वास प्रस्ताव की तरह मुंह की खाया. जानकारी के लिए बता दें, करीब एक महीने पहले संसद में विपक्ष ने बीजेपी को अविश्वास प्रस्ताव को पास करने की चुनौती दी थी, जिसे भारी बहुमत से पास कर बीजेपी ने सारी विपक्षी पार्टियों के मुंह पर ताले जड़ दिए थे.

NEWS SOURCE: Punjab Keshari